topupme20
कभी-कभी कुछ अलग सा महसूस होता हैं ,
ना जाने क्यों , मैं ही तंग आ जाती हूँ , इस खूबसूरत जिन्दगी से, पता नहीं , पर मन में एक सवाल हैं,
क्या फूल कभी अपनी खुशबू से उबा करता होगा ?
क्या नदियों का मन नही होता कि, थोड़ा आराम कर लूँ ?
फिर आती हैं , वही जो न होकर भी सब कुछ हैं , और सिखलाती हैं
वक्त तुम्हारा हैं !चलोगे तो आगे बढ़ोगे,
रुकोगे तो रुकी हुई यादे तुम्हे भिड़-सा घेर लेंगी
गति का अकेलापन,स्थिरता के भीड़-भाड़ से कहीं बेहतर हैं,
इसलिए
जब आती हैं , दूर उस दिशा से, हस्ती-खिलखिलाती , चंचल ⏳
तो कहती हैं , चलोगी मेरे साथ ,
छोड़कर सारे सवाल , मैं ⏳ के संग खेलने निकल पड़ती हूँ
देर सही पर सीख गयी
वक्त हमारा हैं !
Thanks all of you frds .
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